Skip to main content

चाय



उसने आज बोला, मुझे एक बात तो बताओ 
जो सवाल मेरे दिल में है, आज ज़ुबान बोलती है 
यह कैसा है राज़, ज़रा मुझे भी सुनाओ 
चाय की गर्म प्याली, तुम्हारी आँखों में चमक घोलती है 

मैंने भी उसको आज, वो राज़ बोल दिया 
जो अक्सर चाय के बाद, मेरी तबीयत बोलती है 
चाय की चुस्की ही, अक्सर हर सुबह 
मेरी बंद आँखों के, किवाड़ खोलती है 

वो उबलते पानी में, चाय की पत्ती 
फिज़ा में कुछ ऐसी, महक घोलती है 
जैसे मौसम की पहली, बारिश के बाद 
इस धरती की मिट्टी, सौंधी सी महकती है 

यूँ तो बहुत सी, खूबियाँ हैं हर किसी में 
मगर हर चीज़, रंग से भी जानी जाती है 
तुम्हारा साँवला रंग, बहुत पसंद है मुझे 
वजह इसकी यही, साँवली चाय जानती है 

ज़हन में ख़ुशी हो या, नम हों आँखें कभी 
मेरे हर जज़्बात को, यह चाय बाँटती है 
नुक्कड़ की चाय का, मज़ा है दोस्तों के साथ 
महबूब के साथ कॉफ़ी, कहाँ दिल खोलती है 

बीते हुए लम्हों की, यादें हो बिखरी सी 
चाय की चुस्की, हर कड़ी जोड़ती है 
आख़िरत का फ़िक्र हो, ज़हन में कभी 
चाय फिर ज़हन में, सुकून बनकर दौड़ती है 

सुबह का वक़्त हो, शाम हो या हो रात 
घड़ी कहाँ चाय पर, पहरा देती है 
बस तुम जान लो इतना, तो काफ़ी है मेरी जान 
सिर्फ़ चाय ही है जो, तेरे मेरे बीच आ सकती है 


|| लेख़क : सौरव बंसल ||

Comments

Popular posts from this blog

मेरी नज़र

थक कर मेरी नज़र जब ,                                                        दूर कहीं देखती है चूमते हुए आसमाँ को ,                                  ज़मीन को देखती है  चाहतों के बंधे पुल पर ,                                  बिखरे अरमानों को देखती है  इस उलझी सी जिन्दगानी में ,                                          कुछ पल सुकून के देखती है  देखती है सपने ये ,                           रात में दिन में भी  उन सपनों की हक़ीक़त को भी ,       ...

सफ़र

.. सफ़र..  ये सफ़र भी कितना सुहाना होगा अजनबियों के साथ आना जाना होगा एक अनजाने शहर को चला , परिंदों का जैसे घराना होगा ये सफ़र भी कितना सुहाना होगा होठों पर हसीन मुस्कुराहट होगी आँखों ही आँखों में बातें होंगी दिल का मगर घबराना होगा ये सफ़र भी कितना सुहाना होगा बातें होंगी मुलाकातें होंगी  कुछ नयी सी सौगातें होंगी  थोड़ा सुनते थोड़ा सुनाते  हसते हसाते रूठते मनाते  सात दिनों का ये फ़साना होगा  ये सफ़र भी कितना सुहाना होगा  मंज़िलों से होकर बेख़बर रास्तों की रखकर ख़बर चल पड़े सब साथ में , बन इस सफ़र के हमसफ़र फिर कहीं किसी सोच में , हर शख्स का यही गुनगुनाना होगा ये सफ़र भी कितना सुहाना होगा कुछ नए पुराने ख्याल होंगे ज़हन में कई सवाल होंगे एक सूरत जानी अनजानी होगी कहती शायद कोई कहानी होगी इस रंगमंच में हर कोई सयाना होगा ये सफ़र भी कितना सुहाना होगा नए रिश्ते होंगे कुछ गहरे सम्बन्ध होंगे कुछ यादगार पलों के हसीन प्रसंग होंगे इस सफ़र से जब वापिस आना होगा यकीनन ये अनुभव लुभावना होगा यादों की किताब में जैसे , नए अध्याय...

हैरान कर दिया

कहाँ बैठकर कर  रहा है           ये सारी साज़िशें ऐ ख़ुदा तूने हमको           हैरान कर दिया घर के बूढ़े तरसते थे           बच्चों से बात करने को साथ बैठ रामायण देखने का           इंतेज़ाम कर दिया जिन बच्चों को दिखते थे           पापा सिर्फ़ शाम को अब आठों पहर का वक़्त           उनके नाम कर दिया जिनके बच्चे पलते थे           आया की गोद में उन माँओं को देवकी से           यशोदा कर दिया वक़्त नहीं था जिनके पास           पल भर का भी कैद घर में खाली           वो इन्सान कर दिया जो लोग रोज़मर्रा में           गंभीर रहते थे ज़िन्दगी का हर पल           अब एक लतीफ़ा कर दिया खड़ी रह गयी गाड़ियाँ           घरों के सामने फालतू एक पल में       ...